Design a site like this with
Get started


In April 2022, Haryana Chief Minister Mr. Manohar Lal Khattar announced plans for a safari in 10,000 acres in the Aravalli range in Gurugram and Nuh districts of India’s National Capital Region. Aravalli Bachao Citizens Movement along with leading conservationists of India have sent their objections regarding this project to the government and given recommendations. This is the first blog in a series highlighting some of the main objections.

“The term ‘Safari’ gives people the false impression that the proposed Aravalli Safari will be a safari on the lines of what people have experienced in the national parks and wildlife sanctuaries across India like in Corbett, Kanha, Nagarhole etc. Unfortunately, this is far from the truth. The Aravalli Safari project is being conceived and designed as a zoo safari and not a natural jungle safari to see native Aravalli wildlife in their natural habitat. The May 2022 EOI document of the Haryana tourism department explicitly states that the aim of this project is to increase tourist footfall in the state and to increase government and private investment in the tourism sector. Conservation of the Aravallis does not even get a mention in the aims of the project mentioned in the tender,” said Ritika Dubey, a member of the Aravalli Bachao Citizens Movement.

The proposed safari in the Aravallis would include a large zoological exhibition space for reptiles, amphibians, big cats, herbivores, exotic birds, an underwater world, equatorial, tropical, coastal, and desert areas.

“Azoo safari with cages and enclosures in a natural wildlife habitat like the Aravallis which has rich native fauna does not make sense. A large part of the 10,000 acres of area identified for the Aravalli safari park in the state of Haryana harbours a rich diversity of native Aravalli wildlife including 15+ species of mammals such as the northern plains langur, honey-badger, Indian fox, jungle cat, ruddy mongoose, leopards, striped hyenas and others as brought out in a 2019 survey of the Aravalli forests of Gurugram, Faridabad and Delhi supported by WWF India. Aravallis are also home to 200+ native and migratory bird species and many species of butterflies, reptiles and insects. Fragmenting contiguous Aravalli forest area by fencing it will be devastating for the native wildlife especially the big cats like leopards as well as other large animals like the nilgais and hyenas and could lead to man animal conflicts. An independent study by wildlife researchers on bird and animal life and their movement must be done in these 10,000 acres of the Aravallis before any intervention is proposed in this eco-sensitive belt,” said Dr. Ghazala Shahabuddin, an ecologist working on biodiversity conservation in India and Asia.

The EOI May 2022 document of the Haryana tourism department mentions the list of mandatory requirements of structures in the safari park such as clubs, restaurants, aquarium, cable car, open-air theatres, animal cages, entertainment parks, landscaped gardens, electricity lines, road networks etc. 

Prerna Bindra, India’s leading conservationist who has been a member of the National Board for Wildlife and has worked with the government to conserve India’s wildlife and wild habitats said, “Massive amount of construction as envisaged in the Aravalli safari project will result in a lot of unnecessary real estate development that will destroy the native ecosystem of the Aravallis by clearing of trees, undergrowth, vegetation, grasses and other such niche habitats used by the resident wildlife. With the aim of the Haryana government being to increase the number of tourists coming to the Aravalli safari park, the resulting increase in human presence, vehicular traffic, construction, water usage, waste generated will cause more damage to the already at risk, extremely fragile ecosystem devastated by mining. A project of this nature will not support ‘conservation’ and only undermine the ecology and hydrology of the Aravalli area.”

The National Green Tribunal has recently imposed a fine of INR 100 crore on the Haryana government for continued ecological damage to the Aravallis and public health due to mismanagement of the Bandhwari landfill which is now higher than the surrounding Aravalli hills. 

Waterman of India Dr Rajendra Singh said: “Overburdening the Aravallis in Haryana with yet more waste created due to the Aravalli safari park project as a result of construction, influx of labour, tourists etc will be suicidal. Zoo safari project in its current avatar is seeking to commercialise the Aravallis and cannot be allowed in NCR’s climate regulator, green lungs, critical water recharge zone, barrier against desertification and wildlife habitat. The Aravalli ecosystem needs to be conserved, not constructed upon and left alone to serve the critical ecological functions it performs for India’s highly polluted and water stressed National Capital Region.”


अप्रैल 2022 में, हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर ने भारत के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के गुरुग्राम और नूंह जिलों में अरावली रेंज के 10000 एकड़ में प्रस्तावित सफारी योजना की घोषणा की। अरावली बचाओ सिटीजेन्स मूवमेंट  ने भारत के प्रमुख संरक्षणवादियों के साथ मिलकर इस परियोजना के संबंध में सरकार को अपनी आपत्तियां भेजी हैं और सिफारिशें दी हैं। इनमें से प्रमुख आपत्तियों को लोगों तक पहुंचाने वाली श्रृंखला का  यह पहला लेख है।

“सफारी’ शब्द से लोगों को यह भ्रम होता है कि प्रस्तावित ‘अरावली सफारी’  वैसी होगी, जैसी भारत के अन्य राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों जैसे कॉर्बेट, कान्हा, नागरहोल आदि में होती है । दुर्भाग्य से, यह सच्चाई से बहुत दूर है । ‘अरावली सफारी’ परियोजना की कल्पना  प्राकृतिक जंगल सफारी के रूप में नहीं की जा रही है, जिसमें लोगों को  अरावली के वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का मौका मिले। इसकी पूरी कल्पना और डिजाइन एक चिड़ियाघर के समान है, जिसे सफारी का नाम दिया जा रहा है। हरियाणा पर्यटन विभाग के मई 2022 के टेंडर से पहले आमंत्रित किए जाने वाले ईओआई  दस्तावेज़ में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस परियोजना का उद्देश्य राज्य में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि करना और पर्यटन क्षेत्र में सरकारी और निजी निवेश को बढ़ाना है। अरावली बचाओ सिटीज़न्स  मूवमेंट  की सदस्य रितिका दुबे ने कहा है कि इन दस्तावेजों मे कहीं भी अरावली के संरक्षण की बात तक नहीं   की गई है।

इस प्रस्तावित सफारी में एक  बड़ा प्रदर्शनी स्थल होगा जहां सरीसृपों, उभयचरों, बड़ी बिल्लियों, शाकाहारी जानवरों , विदेशी पक्षियों, पानी के जीवों ,भूमध्यरेखीय,  उष्णकटिबंधीय, तटीय और रेगिस्तानी क्षेत्रों के जीवों आदि को लोगों के दिखाने के लिए रखा जाएगा।

“अरावली जैसे   प्राकृतिक रूप से धनी क्षेत्र में, जहां वैसे भी बहुत से  वन्यजीव रहते हैं ,  पिंजरों और बाड़ों वाली चिड़ियाघर सफारी का कोई मतलब ही नहीं बनता। हरियाणा राज्य में अरावली सफारी पार्क के लिए चुने गए 10,000 एकड़ क्षेत्र के एक बहुत बड़े हिस्से में विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों की भरमार है , जिसमें स्तनधारियों की 15+ प्रजातियां शामिल हैं, जैसे कि उत्तरी मैदानी लंगूर, हनी-बैजर, भारतीय लोमड़ी, जंगली बिल्ली, लाल नेवले, तेंदुए, धारीदार लकड़बग्घे इत्यादि ।   यह डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया द्वारा समर्थित गुरुग्राम, फरीदाबाद और दिल्ली के अरावली के जंगलों में किए गए 2019 के सर्वेक्षण की रिपोर्ट में बताया गया था ।  अरावली मे 200+ स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां रहती हैं और तितलियों, सरीसृपों और कीड़ों की कई प्रजातियों का भी आवास है। इस  अरावली वन क्षेत्र को बाड़ से खंडित करके हिस्सों में बांटना यहां के प्राकृतिक  वन्यजीवों के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा;  विशेष रूप से तेंदुए जैसे बड़े जानवरों के  लिए और साथ ही अन्य बड़े जानवरों जैसे नीलगाय और लकड़बग्घे के लिए भी।  ऐसा करना इन जानवरों और स्थानीय लोगो के बीच संघर्ष का कारण  भी बन सकता  है। इससे पहले कि  पर्यावरण के दृष्टिकोण से संवेदनशील  इस इलाके में कोई  भी हस्तक्षेप  किया जाए, अरावली की इस 10,000 एकड़ भूमि के पशु  और पक्षी जीवन पर वन्यजीव शोधकर्ताओं द्वारा एक स्वतंत्र अध्ययन किया जाना चाहिए, ” डॉ. ग़ज़ाला शहाबुद्दीन ने कहा, जो भारत और एशिया में जैव विविधता संरक्षण पर काम कर रही एक इकोलॉजिस्ट हैं।

हरियाणा पर्यटन विभाग के मई 2022 के ईओआई दस्तावेज़ में सफारी पार्क में प्रस्तावित  उन संरचनाओं का उल्लेख है, जो अनिवार्य हैं। इस सूची में क्लब, रेस्तरां,  मछलीघर , केबल कार, ओपन-एयर थिएटर, पशुओं के पिंजरे, मनोरंजन पार्क, प्राकृतिक उद्यान, बिजली की लाइनें, सड़क नेटवर्क आदि सब शामिल हैं।

प्रेरणा बिंद्रा, भारत की एक प्रख्यात संरक्षणवादी, जो राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की सदस्य  भी रही हैं और भारत के वन्यजीवों और वन्य आवासों के संरक्षण के लिए सरकार के साथ काम कर चुकी हैं, ने कहा, “अरावली सफारी परियोजना में बहुत भारी मात्रा में निर्माण कार्य किए जाने का प्रावधान है। इस के लिए  जो रीयल एस्टेट का विकास होगा, वह बिल्कुल गैर जरूरी होगा  और यह अरावली के मूल ईकोसिस्ट्म को बिल्कुल नष्ट कर देगा। क्योंकि इस निर्माण के लिए पेड़ों, झाड़ियों, वनस्पतियों, घासों आदि को पूरी तरह से साफ कर दिया जाएगा, जो यहां रहने वाले वन्य जीव  उपयोग करते हैं।

अरावली का इकोसिस्टम, गैर कानूनी खनन के कारण पहले से ही अत्यंत नाजुक स्थिति में पहुंच चुका है।‌ हरियाणा सरकार का उद्देश्य अरावली सफारी पार्क में आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि करना है, जिसका मतलब है कि यहां ज्यादा लोग आएंगे, ज्यादा  वाहनों का आवागमन होगा, निर्माण होगा, अत्यधिक पानी का  उपयोग होगा, ज्यादा कूड़ा कचरा  पैदा होगा । इस सबके कारण अरावली के इस नाज़ुक इकोसिस्टम को और अधिक नुकसान होगा। इस तरह की परियोजना किसी भी तरह के संरक्षण को ध्यान में नहीं रख सकती और यह अरावली  क्षेत्र की पारिस्थितिकी ( इकालोजी ) और  जल विज्ञान ( हाइडरौलिजी) को और कमजोर करेगी।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने हाल ही में बांधवारी लैंडफिल के कुप्रबंधन के कारण, अरावली को और लोगों के स्वास्थ्य को हुए नुकसान के जुर्म में,  हरियाणा सरकार पर 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। बंधवारी का कूड़े का पहाड़ ,आस पास की अरावली की पहाड़ियो से ज्यादा ऊंचा हो चुका है।

वाटरमैनऑफइंडियाडॉ. राजेंद्रसिंहनेकहाहै, “अरावली सफारी पार्क परियोजना में प्रस्तावित निर्माण के लिए अरावली में श्रमिकों का आगमन होगा, पर्यटक आएंगे, जिससे  और अधिक  कचरा पैदा होगा , जो  अरावली के लिए आत्मघाती सिद्ध होगा।     चिड़ियाघर सफारी परियोजना अपने वर्तमान प्रारुप में अरावली का व्यावसायीकरण करने की मंजूरी दे रही है। इस तरह के प्रोजेक्ट को बिलकुल भी  अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यह एनसीआर की जलवायु नियंत्रण करने वाली, हरित फेफड़े कहीं जाने वाली, महत्वपूर्ण जल पुनर्भरण क्षेत्र, मरुस्थलीकरण रोकने में सहायक और वन्य जीवों को आवास दे रही अरावली को नुक्सान पहुंचाएगा । अरावली ईकोसिस्टम के संरक्षण की सख्त जरूरत है, ना कि उसमें निर्माण करने की।  दिल्ली राजधानी क्षेत्र वैसे भी  भयंकर वायु प्रदूषण  और पानी  की कमी से जूझ रहा है, और ऐसी हालत में अरावली के ईकोसिस्टम  से   किसी भी तरह की छेड़ छाड़ बिल्कुल भी सही नहीं है।”


Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in: Logo

You are commenting using your account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: